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डॉ. सरस्वती कुशवाह
सलाहकार - आंतरिक चिकित्सा
MBBS, MD (आंतरिक चिकित्सा)
पारस हेल्थ, कानपुर
डॉ. सरस्वती कुशवाह के बारे में
डॉ. सरस्वती कुशवाह ने आंतरिक चिकित्सा विभाग, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ में 3 वर्षों की वरिष्ठ रेजीडेंसी पूरी की है, पूर्व सहायक प्रोफेसर, एएसएमसी फतेहपुर।
विशेषज्ञता का क्षेत्र
- मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थायरॉइड विकार, अस्थमा और सीओपीडी, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकारों का निदान और प्रबंधन।
- टाइफाइड बुखार, डेंगू बुखार, मलेरिया, स्क्रब टाइफस, तपेदिक जैसे संक्रामक रोगों का निदान और प्रबंधन।
- रुमेटोलॉजिकल विकार जैसे रुमेटॉइड आर्थराइटिस, ऑस्टियोआर्थराइटिस, गठिया जैसी पुरानी बीमारियों का प्रबंधन।
- टीकाकरण, कैंसर जांच, नियमित स्वास्थ्य जांच और जीवनशैली परामर्श सहित निवारक दवाएं।
ओपीडी अनुसूची
समय: प्रातः 9:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक
दिन: सोमवार से शनिवार
विशेष रुचियाँ
- वयस्कों में रोगों की रोकथाम, निदान और उपचार में विशेषज्ञता।
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वेल्नेस ब्लॉग
Dietetics & Nutrition | Post Date : जून 24, 2026
क्या आपको रात में देखने में परेशानी होती है? क्या आपकी त्वचा पहले जैसी चमकदार नहीं दिखती? या फिर आप बार-बार बीमार पड़ जाते हैं? अगर हां, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से एक है विटामिन A की कमी।
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Internal Medicine | Post Date : सित. 05, 2025
बरसात का मौसम हो या दूषित पानी की समस्या, पानी से फैलने वाली बीमारियाँ (Waterborne Diseases) हमारे देश में बहुत आम हैं। गंदा पानी, अस्वच्छ भोजन और खराब स्वच्छता इनके फैलाव की मुख्य वजहें हैं।
इनका असर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों पर अधिक होता है। WHO के अनुसार, हर साल लाखों लोग इन बीमारियों से प्रभावित होते हैं।
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Internal Medicine | Post Date : अग. 18, 2025
महिलाओं में हाई ESR का मतलब है कि शरीर में कहीं सूजन या इंफेक्शन हो सकता है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि संकेत है। नॉर्मल लेवल 18–50 साल में 0–20 mm/hr और 50 साल से ऊपर 0–30 mm/hr होता है। प्रेग्नेंसी, एनीमिया, थायरॉइड, इंफेक्शन जैसी वजहों से बढ़ सकता है। सही जांच, संतुलित डाइट और डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है।
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Internal Medicine | Post Date : जुल. 30, 2025
क्या 99 डिग्री बुखार होता है?
बच्चों और बुज़ुर्गों का तापमान अलग क्यों होता है?
बुखार कब खतरनाक होता है?
ये ऐसे सवाल हैं जो हम सभी के मन में आते हैं, खासकर जब किसी अपने को बुखार होता है।
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Dietetics & Nutrition | Post Date : जुल. 19, 2025
क्या आपने कभी सोचा है कि रोज़ का साधारण सा फल – पपीता (Papaya) – आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है?
यह फल न सिर्फ आपकी पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है, बल्कि यह डायबिटीज से लेकर त्वचा, वज़न, आंखों की सेहत और यहां तक कि कैंसर से सुरक्षा में भी भूमिका निभाता है। आइए जानते हैं पपीता खाने के ढेरों फ़ायदे, डॉक्टरों की राय और जरूरी सावधानियां।
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Internal Medicine | Post Date : जून 03, 2025
गर्मी के मौसम में जब तापमान तेज़ी से बढ़ता है, तब लू लगने का खतरा भी बढ़ जाता है। लू लगना यानी हीट स्ट्रोक (Heat Stroke) — एक ऐसी स्थिति जिसमें शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और शरीर के अंदर का कूलिंग सिस्टम काम करना बंद कर देता है। समय पर इलाज न हो तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
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Internal Medicine | Post Date : मई 14, 2026
सर्दियों के मौसम में बाजार में दिखने वाली लाल और ताजी गाजर सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ाती, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। भारत में गाजर का इस्तेमाल सलाद, जूस, सूप, सब्जी और गाजर के हलवे तक में किया जाता है। यही वजह है कि गाजर के फायदे हर उम्र के लोगों के लिए चर्चा का विषय बने रहते हैं।
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Internal Medicine | Post Date : अप्रै. 08, 2026
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोटापा (Obesity) एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन चुका है। गलत खान-पान, कम शारीरिक गतिविधि और तनाव भरी लाइफस्टाइल के कारण वजन तेजी से बढ़ रहा है। शुरुआत में यह सिर्फ “थोड़ा वजन बढ़ना” लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यह कई बीमारियों का कारण बन सकता है।
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Internal Medicine | Post Date : दिस. 27, 2025
हम में से ज़्यादातर लोग तब ही शरीर का तापमान नापते हैं, जब बुखार या तबीयत खराब लगती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सामान्य शरीर का तापमान वास्तव में कितना होता है?
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Internal Medicine | Post Date : अक्टू. 30, 2025
नींबू — छोटा सा पीला फल, लेकिन इसके अंदर छिपे हैं सेहत के अनगिनत राज़। भारत में शायद ही कोई रसोई ऐसी हो जहाँ नींबू न हो। चाहे खाने में स्वाद बढ़ाना हो, सर्दी-जुकाम भगाना हो, वजन घटाना हो या चेहरे पर चमक लानी हो — नींबू हर काम में असरदार साबित होता है।
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Internal Medicine | Post Date : अक्टू. 25, 2025
संक्रामक रोग या संचारी रोग (Sanchari Rog) ऐसी बीमारियाँ हैं जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक संक्रमण (Infection) के माध्यम से फैलती हैं। इन रोगों के मुख्य कारण वायरस (Virus), बैक्टीरिया (Bacteria), फंगस (Fungus) और परजीवी (Parasite) जैसे सूक्ष्मजीव हैं जो हमारी शरीर में घुसकर बीमारी उत्पन्न कर देते हैं।
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Internal Medicine | Post Date : सित. 25, 2025
हम जो खाना खाते हैं, वही हमारे स्वास्थ्य की नींव तय करता है। अगर भोजन संतुलित हो तो शरीर मज़बूत रहता है और बीमारियाँ पास नहीं आतीं। लेकिन जब पाचन तंत्र (digestive system) गड़बड़ हो जाए, तो कब्ज, गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याएँ शुरू हो जाती हैं।
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